Hindi Practice Question and Answer
8 Q: इनमें से किस विकल्प के सभी वर्ण मूर्धन्य है-
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63bffe06b1afa963d16e0f33- 1ट, ढ, प, फfalse
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Answer : 4. "र, ड, प, ट"
Q: 'तेजस्वी' का विलोम है-
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632db87d31300b7ce47a9455- 1मेधावीfalse
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Answer : 2. "निस्तेज"
Q: 'आवश्यकता से अधिक धनसम्पत्ति एकत्र न करना' वाक्यांश के लिए सार्थक शब्द है –
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632db1131656651c9eaaed64- 1अस्तेयfalse
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Answer : 2. "अपरिग्रह"
Q: निम्न में से कौनसा शब्द शुद्ध है?
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636a535a825f2247ad70c515- 1उज्वलfalse
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Answer : 4. "उज्ज्वल"
Q: "नेताजी ने भारत की स्वतंत्रता में बड़ा योगदान दिया।" वाक्य में रेखांकित पद में संज्ञा है-
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63c000d0b1afa963d16e2204- 1व्यक्तिवाचक संज्ञाtrue
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- 4उपर्युक्त में से कोई नहींfalse
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Answer : 1. "व्यक्तिवाचक संज्ञा"
Q: रसोईघर का सही सामासिक विग्रह निम्न में से कौन सा है?
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627ced67d84556078ab51e62- 1रसोई से घरfalse
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Answer : 4. "रसोई के लिए घर "
Q: एईक्य का शुद्ध रूप निम्र में से कौन है?
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627ceb07d84556078ab51b3f- 1एकाfalse
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Answer : 4. "ऐक्य "
Q:निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए:
हमारे देश में एक ऐसा भी युग था जब नैतिक और आध्यात्मिक विकास ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य माना जाता था। अहिंसा की भावना सर्वोपरि थी। आज पूरा जीवन दर्शन ही बदल गया है। सर्वत्र पैसे की हाय हाय तथा धन का उपार्जन ही मुख्य ध्येय हो गया है, भले ही धन - उपार्जन के तरीके गलत ही क्यों न हों। इन सबका असर मनुष्य के प्रतिदिन के जीवन पर पड़ रहा है। समाज का वातावरण दूषित हो गया है। इन सबके कारण मानसिक और शारीरिक तनाव - खिंचाव और व्याधियाँ पैदा हो रही हैं।
आज आदमी धन के पीछे अंधाधुंध दौड़ रहा है। पाँच रुपये मिलने पर दस दस मिलने पर सौ और सौ मिलने पर हजार की लालसा लिए वह इस अंधी दौड़ में शामिल है। इस दौड़ का कोई अंत नहीं । धन की इस दौड़ में सभी पारिवारिक और मानवीय संबंध पीछे छूट गए। व्यक्ति सत्य - असत्य, उचित - अनुचित, न्याय - अन्याय और अपने - पराए के भेद - भाव को भूल गया। उसके पास अपनी पत्नी और संतान के लिए भी समय नहीं धन के लिए पुत्र का पिता के साथ, बेटी का माँ के साथ और पति का पत्नी के साथ झगड़ा हो रहा है। भाई - भाई के खून का प्यासा है। धन की लालसा व्यक्ति को जघन्य से जघन्य कार्य करने के लिए उकसा रही है। इस लालसा का ही परिणाम है कि जगह - जगह हत्या, लूट, अपहरण और चोरी डकैती की घटनाएँ बढ़ रही हैं। इस रोगी मनोवृत्ति को बदलने के लिए हमें हर स्तर पर प्रयत्न करने होंगे।
'शारीरिक' शब्द में प्रत्यय करने पर शब्द बनेगा-
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6241d2b5a5fde25dcf48558fहमारे देश में एक ऐसा भी युग था जब नैतिक और आध्यात्मिक विकास ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य माना जाता था। अहिंसा की भावना सर्वोपरि थी। आज पूरा जीवन दर्शन ही बदल गया है। सर्वत्र पैसे की हाय हाय तथा धन का उपार्जन ही मुख्य ध्येय हो गया है, भले ही धन - उपार्जन के तरीके गलत ही क्यों न हों। इन सबका असर मनुष्य के प्रतिदिन के जीवन पर पड़ रहा है। समाज का वातावरण दूषित हो गया है। इन सबके कारण मानसिक और शारीरिक तनाव - खिंचाव और व्याधियाँ पैदा हो रही हैं।
आज आदमी धन के पीछे अंधाधुंध दौड़ रहा है। पाँच रुपये मिलने पर दस दस मिलने पर सौ और सौ मिलने पर हजार की लालसा लिए वह इस अंधी दौड़ में शामिल है। इस दौड़ का कोई अंत नहीं । धन की इस दौड़ में सभी पारिवारिक और मानवीय संबंध पीछे छूट गए। व्यक्ति सत्य - असत्य, उचित - अनुचित, न्याय - अन्याय और अपने - पराए के भेद - भाव को भूल गया। उसके पास अपनी पत्नी और संतान के लिए भी समय नहीं धन के लिए पुत्र का पिता के साथ, बेटी का माँ के साथ और पति का पत्नी के साथ झगड़ा हो रहा है। भाई - भाई के खून का प्यासा है। धन की लालसा व्यक्ति को जघन्य से जघन्य कार्य करने के लिए उकसा रही है। इस लालसा का ही परिणाम है कि जगह - जगह हत्या, लूट, अपहरण और चोरी डकैती की घटनाएँ बढ़ रही हैं। इस रोगी मनोवृत्ति को बदलने के लिए हमें हर स्तर पर प्रयत्न करने होंगे।
- 1शरीर+ ईकfalse
- 2शरीर+ इकtrue
- 3शरिर+ इकfalse
- 4इनमे से नहींfalse
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