Hindi Practice Question and Answer
8 Q: किस वाक्य में 'निजवाचक सर्वनाम' का प्रयोग नहीं हुआ है?
990 063a053cf67924740be564e80
63a053cf67924740be564e80- 1वे अपने आप चले गए।false
- 2वह अपने आपको बहुत होशियार समझता है।false
- 3मैं आप लोगों का बहुत आभारी हूँ ।true
- 4किसान अपने आप में मस्त रहता है।false
- Show AnswerHide Answer
- Workspace
- SingleChoice
Answer : 3. "मैं आप लोगों का बहुत आभारी हूँ । "
Q: किस समास में प्रथम पद विशेषण (उपमान) एवं द्वितीय पद विशेष्य (उपमेय) होता है?
988 06365096ad054d401561579c6
6365096ad054d401561579c6- 1बहुव्रीहि समासfalse
- 2कर्मधारय समासtrue
- 3नञ् तत्पुरुष समासfalse
- 4अलुक् तत्पुरुष समासfalse
- Show AnswerHide Answer
- Workspace
- SingleChoice
Answer : 2. "कर्मधारय समास"
Q: किस विकल्प में सभी 'स्त्रीलिंग' शब्द हैं?
986 063ad5aa3fb04114b2d461d1e
63ad5aa3fb04114b2d461d1e- 1उल्लू, सभा, आँखfalse
- 2केंचुआ, फौज़, प्रजाfalse
- 3चील, जोंक, कोयलtrue
- 4भेड़िया, टोली, बाघfalse
- Show AnswerHide Answer
- Workspace
- SingleChoice
Answer : 3. "चील, जोंक, कोयल"
Explanation :
1. संज्ञा शब्द के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि वह पुरुष जाति का है या स्त्री जाति का, उसे लिंग कहते हैं।
- पुल्लिंग – जो शब्द पुरुष जाति का बोध कराते हैं, वे पुल्लिंग कहलाते हैं; जैसे- विद्वान मोती, कौआ, खरगोश, मंडल घोड़ा, हाथी, कुत्ता, आयुष पक्षी, चीता, पानी आदि।
- स्त्रीलिंग - जो शब्द स्त्रीलिंग जाति का बोध कराते हैं, वे स्त्रीलिंग कहलाते हैं; जैसे- वकालत, कवयित्री, लिपि, पढ़ाई, समझ,ममता, चील, जोंक, कोयल, विदुषी, तृष्णा, बेटी, पुत्री, शिक्षिका, गाय, मोरनी, माता, लड़की, भेद, गाय, भैंस, बकरी, लोमड़ी, बंदरिया, मछली, बुढिया, शेरनी, नारी, रानी आदि।
Q: पर्यंक शब्द का तदभव रूप होगा
986 0610136741d56ff6b40a4b348
610136741d56ff6b40a4b348- 1पापड़false
- 2पलँगtrue
- 3पर्यन्तfalse
- 4पहलfalse
- Show AnswerHide Answer
- Workspace
- SingleChoice
Answer : 2. "पलँग"
Q:निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नके उत्तर दीजिए :
इतिहास प्रमाणित कर देता है कि ऐसे दासत्व बहुत काल के उपरान्त एक अद्भुत संहारक शक्ति को जन्म देते हैं, जिसकी बाढ़ को रोकने में शक्तिशाली भी समर्थ नहीं हो सके। मनुष्य स्वभावतः जीवन से बहुत प्यार करता है, परन्तु जब सहयोगियों के निष्ठुर उत्पीड़न से वह नितान्त दुर्वह हो उठता है, तब उसकी ममता घोरतम विरक्ति में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ितों का समाधान संभव हो सकता है, परन्तु ऐसे में हताश और जीवन के प्रति निर्मम व्यक्तियों का संभाषण संभव नहीं है। ऐसे व्यक्तियों का वेग आँधी के समान चक्षुहीन, बाढ़ के समान दिशाहीन और विद्युत के समान लक्ष्यहीन हो जाता है।
निम्न में से कौन - सा विकल्प जातिवाचक संज्ञा से भाववाचक संज्ञा बनने का है?
984 0621f451318802b47fa622540
621f451318802b47fa622540इतिहास प्रमाणित कर देता है कि ऐसे दासत्व बहुत काल के उपरान्त एक अद्भुत संहारक शक्ति को जन्म देते हैं, जिसकी बाढ़ को रोकने में शक्तिशाली भी समर्थ नहीं हो सके। मनुष्य स्वभावतः जीवन से बहुत प्यार करता है, परन्तु जब सहयोगियों के निष्ठुर उत्पीड़न से वह नितान्त दुर्वह हो उठता है, तब उसकी ममता घोरतम विरक्ति में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ितों का समाधान संभव हो सकता है, परन्तु ऐसे में हताश और जीवन के प्रति निर्मम व्यक्तियों का संभाषण संभव नहीं है। ऐसे व्यक्तियों का वेग आँधी के समान चक्षुहीन, बाढ़ के समान दिशाहीन और विद्युत के समान लक्ष्यहीन हो जाता है।
- 1शून्यताfalse
- 2उत्पीड़नfalse
- 3उपयोगिताfalse
- 4दासत्वtrue
- Show AnswerHide Answer
- Workspace
- SingleChoice
Answer : 4. "दासत्व "
Q:निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए
महापुरुष लोग जब आते हैं हम, अच्छी तरह नहीं पहचान पाते, क्योंकि हमारा मन भीरू और अस्वच्छ है, स्वभाव शिथिल है, अभ्यास दुर्बल है. हमारे मन में वह क्षमता नहीं है जिससे हम महानता को पूरी तरह समझ सकें, उसको ग्रहण कर सकें. जो महापुरुष प्रेम देकर अपना परिचय देते हैं, उनको हम उनके प्रेम से किसी सीमा तक समझ भी सकते हैं. हम लोग समझ गए हैं कि,” गांधी जी हमारे हैं.” उनके प्रेम में ऊंच-नीच का अंतर नहीं है, मूर्ख और विद्वान का अंतर नहीं है, अमीर और गरीब का भेद नहीं है. उन्होंने अपना प्रेम सभी को समान रूप से वितरित किया है. उन्होंने कहा,” सबका कल्याण हो, सबका मंगल हो “. उन्होंने जो भी कहा है वह केवल बातों से नहीं कहा है अपितु दुख की वेदना से कहा है. उनका धैर्य देखकर, ममता देखकर, उनका संकल्प सिद्ध हो गया है, किंतु किसी प्रकार की जोर जबरदस्ती से नहीं अपितु त्याग द्वारा, दुख द्वारा, तपस्या द्वारा वह अपने संकल्प में सफल हुए
'महापुरुष' में प्रयुक्त समास का नाम क्या है?
982 0621f40ba30b5265430efa1c2
621f40ba30b5265430efa1c2महापुरुष लोग जब आते हैं हम, अच्छी तरह नहीं पहचान पाते, क्योंकि हमारा मन भीरू और अस्वच्छ है, स्वभाव शिथिल है, अभ्यास दुर्बल है. हमारे मन में वह क्षमता नहीं है जिससे हम महानता को पूरी तरह समझ सकें, उसको ग्रहण कर सकें. जो महापुरुष प्रेम देकर अपना परिचय देते हैं, उनको हम उनके प्रेम से किसी सीमा तक समझ भी सकते हैं. हम लोग समझ गए हैं कि,” गांधी जी हमारे हैं.” उनके प्रेम में ऊंच-नीच का अंतर नहीं है, मूर्ख और विद्वान का अंतर नहीं है, अमीर और गरीब का भेद नहीं है. उन्होंने अपना प्रेम सभी को समान रूप से वितरित किया है. उन्होंने कहा,” सबका कल्याण हो, सबका मंगल हो “. उन्होंने जो भी कहा है वह केवल बातों से नहीं कहा है अपितु दुख की वेदना से कहा है. उनका धैर्य देखकर, ममता देखकर, उनका संकल्प सिद्ध हो गया है, किंतु किसी प्रकार की जोर जबरदस्ती से नहीं अपितु त्याग द्वारा, दुख द्वारा, तपस्या द्वारा वह अपने संकल्प में सफल हुए
- 1तत्पुरुष समासfalse
- 2कर्मधारय समासtrue
- 3अव्ययीभाव समासfalse
- 4बहुव्रीहि समासfalse
- Show AnswerHide Answer
- Workspace
- SingleChoice
Answer : 2. "कर्मधारय समास"
Q: ‘अनुराग’ का विलोम है-
981 0624f165b9e00783c5721128c
624f165b9e00783c5721128c- 1रागfalse
- 2विरागtrue
- 3प्रेमfalse
- 4इनमे कोई नहींfalse
- Show AnswerHide Answer
- Workspace
- SingleChoice
Answer : 2. "विराग"
Q: किस विकल्प में सभी शब्द परस्पर पर्यायवाची नहीं हैं?
980 063a05e3267924740be56a390
63a05e3267924740be56a390- 1आत्मजा, दुहिताfalse
- 2चक्षु, मयंकtrue
- 3उपल, प्रस्तरfalse
- 4अरविंद, पुंडरीकfalse
- Show AnswerHide Answer
- Workspace
- SingleChoice

