General Hindi Practice Question and Answer
8 Q: जिस समास में दोनों पदों की प्रधानता होती है, वह कहलाता है –
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63456cc145573528560261ba- 1द्विगु समासfalse
- 2बहुव्रीहि समासfalse
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- 4तत्पुरुष समासfalse
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Answer : 3. "द्वन्द्व समास"
Q: अपने मोहल्ले में सफाई के लिए अधिकारी को लिखे जाने वाले सम्बोधन का रूप होगा-
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63998e70d319b37ca1c8c423- 1श्रीमान् अध्यक्ष नगरपालिकाtrue
- 2श्रीमान् मुख्यमंत्री महोदयfalse
- 3श्रीमान् प्रधानमंत्री महोदयfalse
- 4श्रीमान् राष्ट्रपति महोदयfalse
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Answer : 1. "श्रीमान् अध्यक्ष नगरपालिका"
Q: निम्नलिखित में से 'निर्' उपसर्ग से बना शब्द है-
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636509d5d054d40156157bb0- 1निराकरणfalse
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Answer : 4. "उपरोक्त सभी"
Q: 'इक' प्रत्यय से निर्मित शब्द नहीं है –
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634571731bfb042f96b5f40f- 1सात्विकfalse
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Answer : 4. "मोहक"
Q:निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नउत्तर लिखिए :
जीवन के किसी भी क्षेत्र में शिखर तक पहुंचने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम की आवश्यकता पड़ती है। कई लोग ऐसे भी हुए हैं जिन्होंने शारीरिक अक्षमता के बावजूद संघर्ष किया है और लक्ष्य प्राप्त किया है। ऐसा ही एक नाम है- सुधा चंद्रन पैर खराब होने के बावजूद वह चोटी की नृत्यांगना बनी। सुधा चंद्रन की माता श्रीमती धंगम एवं पिता श्री के. डी . चंद्रन की हार्दिक इच्छा थी कि उनकी पुत्री राष्ट्रीय ख्याति की नृत्यांगना बने। इसीलिए चंद्रन दंपति ने सुधा को पाँच वर्ष की अल्पायु में ही मुंबई के प्रसिद्ध नृत्य विद्यालय ' कला - सदन में प्रवेश दिलवाया। पहले पहल तो नृत्य विद्यालय के शिक्षकों ने इतनी छोटी उम्र की बच्ची के दाखिले में हिचकिचाहट महसूस की किंतु सुधा की प्रतिभा देखकर सुप्रसिद्ध नृत्य शिक्षक श्री के . एस. रामास्वामी भागवतार ने उसे शिष्या के रूप में स्वीकार कर लिया और सुधा उनसे नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करने लगी।
विद्यालय की सन्धि क्या है?
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623826c79980d16e36555fbbजीवन के किसी भी क्षेत्र में शिखर तक पहुंचने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम की आवश्यकता पड़ती है। कई लोग ऐसे भी हुए हैं जिन्होंने शारीरिक अक्षमता के बावजूद संघर्ष किया है और लक्ष्य प्राप्त किया है। ऐसा ही एक नाम है- सुधा चंद्रन पैर खराब होने के बावजूद वह चोटी की नृत्यांगना बनी। सुधा चंद्रन की माता श्रीमती धंगम एवं पिता श्री के. डी . चंद्रन की हार्दिक इच्छा थी कि उनकी पुत्री राष्ट्रीय ख्याति की नृत्यांगना बने। इसीलिए चंद्रन दंपति ने सुधा को पाँच वर्ष की अल्पायु में ही मुंबई के प्रसिद्ध नृत्य विद्यालय ' कला - सदन में प्रवेश दिलवाया। पहले पहल तो नृत्य विद्यालय के शिक्षकों ने इतनी छोटी उम्र की बच्ची के दाखिले में हिचकिचाहट महसूस की किंतु सुधा की प्रतिभा देखकर सुप्रसिद्ध नृत्य शिक्षक श्री के . एस. रामास्वामी भागवतार ने उसे शिष्या के रूप में स्वीकार कर लिया और सुधा उनसे नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करने लगी।
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- 4विद्या + आलयाfalse
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Answer : 1. "विद्या + आलय"
Q: विशेषण की उत्तमावस्था का प्रयोग किस वाक्य में किया गया है?
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6283a68a6a603148478e1619- 1यह बहुत सुंदर चित्र है।false
- 2मेरा घर उसके घर से छोटा है।false
- 3उसे सर्वाधिक अंक प्राप्त हुए।true
- 4मोहन की अपेक्षा सोहन होशियार है।false
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Answer : 3. "उसे सर्वाधिक अंक प्राप्त हुए। "
Q: निम्नलिखित संयुक्त वाक्य का अंग्रेजी में अनुवाद करें -
'वह गरीब है परंतु ईमानदार है।'
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63998d6affa5c734fee2937f'वह गरीब है परंतु ईमानदार है।'
- 1He is poor but he is honest.true
- 2He was poor but he was honest.false
- 3He was a poor man but he is honest.false
- 4He is honest but he is poor.false
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Answer : 1. "He is poor but he is honest."
Q:निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नके उत्तर दीजिए :
इतिहास प्रमाणित कर देता है कि ऐसे दासत्व बहुत काल के उपरान्त एक अद्भुत संहारक शक्ति को जन्म देते हैं, जिसकी बाढ़ को रोकने में शक्तिशाली भी समर्थ नहीं हो सके। मनुष्य स्वभावतः जीवन से बहुत प्यार करता है, परन्तु जब सहयोगियों के निष्ठुर उत्पीड़न से वह नितान्त दुर्वह हो उठता है, तब उसकी ममता घोरतम विरक्ति में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ितों का समाधान संभव हो सकता है, परन्तु ऐसे में हताश और जीवन के प्रति निर्मम व्यक्तियों का संभाषण संभव नहीं है। ऐसे व्यक्तियों का वेग आँधी के समान चक्षुहीन, बाढ़ के समान दिशाहीन और विद्युत के समान लक्ष्यहीन हो जाता है।
‘बाढ़' के समान दिशाहीन ' वाक्यांश में रेखांकित पद है
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621f461130b5265430efcce7इतिहास प्रमाणित कर देता है कि ऐसे दासत्व बहुत काल के उपरान्त एक अद्भुत संहारक शक्ति को जन्म देते हैं, जिसकी बाढ़ को रोकने में शक्तिशाली भी समर्थ नहीं हो सके। मनुष्य स्वभावतः जीवन से बहुत प्यार करता है, परन्तु जब सहयोगियों के निष्ठुर उत्पीड़न से वह नितान्त दुर्वह हो उठता है, तब उसकी ममता घोरतम विरक्ति में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ितों का समाधान संभव हो सकता है, परन्तु ऐसे में हताश और जीवन के प्रति निर्मम व्यक्तियों का संभाषण संभव नहीं है। ऐसे व्यक्तियों का वेग आँधी के समान चक्षुहीन, बाढ़ के समान दिशाहीन और विद्युत के समान लक्ष्यहीन हो जाता है।
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