General Hindi Question and Answer Practice Question and Answer
8 Q: निम्नलिखित शब्दों में से शुद्ध शब्द है -
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6348c0821bfb042f96c81e35- 1आगामीtrue
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Answer : 1. "आगामी"
Q: 'किसी बात के मर्म को जानने वाला' वाक्यांश के लिए सही शब्द है -
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6349296470d7b666d7f1835a- 1मार्मिकfalse
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Answer : 2. "मर्मज"
Q:निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नउत्तर लिखिए :
आचार्य द्रोण महर्षि भरद्वाज के पुत्र थे। पांचाल - नरेश का पुत्र द्रुपद भी द्रोण के साथ ही भरद्वाज - आश्रम में शिक्षा पा रहा था। दोनों में गहरी मित्रता थी। कभी - कभी राजकुमार द्रुपद उत्साह में आकर दोण से यहाँ तक कह देता था कि पांचाल देश का राजा बन जाने पर मैं आधा राज्य तुम्हें दे दूँगा। शक्षा समाप्त होने पर द्रोणाचार्य ने कृपाचार्य की बहन से ब्याह कर लिया। उससे उनके एक पुत्र हुआ, जिसका नाम उन्होंने अश्वत्थामा रखा । द्रोण अपनी पत्नी और पुत्र को बड़ा प्रेम करते थे। द्रोण बड़े गरीब थे। वह चाहते थे कि धन गप्त किया जाए और अपनी पत्नी व पुत्र के साथ सुख से रहा जाए । उन्हें खबर लगी कि परशुराम अपनी सारी संपत्ति गरीब ब्राह्मणों को बाँट रहे हैं , तो भागे - भागे उनके पास गए , लेकिन उनके नहुँचने तक परशुराम अपनी सारी संपत्ति वितरित कर चुके थे और वन - गमन की तैयारी कर रहे थे । दोण को देखकर वह बोले- " ब्राह्मण श्रेष्ठ ! आपका स्वागत है। पर मेरे पास जो कुछ था , वह मैं बाँट चुका हूँ । अब यह मेरा शरीर और धनुर्विद्या ही है। बताइए, मैं आपके लिए क्या करूँ? "
महर्षि की सन्धि क्या है?
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6231e561de069f6e1b884a63आचार्य द्रोण महर्षि भरद्वाज के पुत्र थे। पांचाल - नरेश का पुत्र द्रुपद भी द्रोण के साथ ही भरद्वाज - आश्रम में शिक्षा पा रहा था। दोनों में गहरी मित्रता थी। कभी - कभी राजकुमार द्रुपद उत्साह में आकर दोण से यहाँ तक कह देता था कि पांचाल देश का राजा बन जाने पर मैं आधा राज्य तुम्हें दे दूँगा। शक्षा समाप्त होने पर द्रोणाचार्य ने कृपाचार्य की बहन से ब्याह कर लिया। उससे उनके एक पुत्र हुआ, जिसका नाम उन्होंने अश्वत्थामा रखा । द्रोण अपनी पत्नी और पुत्र को बड़ा प्रेम करते थे। द्रोण बड़े गरीब थे। वह चाहते थे कि धन गप्त किया जाए और अपनी पत्नी व पुत्र के साथ सुख से रहा जाए । उन्हें खबर लगी कि परशुराम अपनी सारी संपत्ति गरीब ब्राह्मणों को बाँट रहे हैं , तो भागे - भागे उनके पास गए , लेकिन उनके नहुँचने तक परशुराम अपनी सारी संपत्ति वितरित कर चुके थे और वन - गमन की तैयारी कर रहे थे । दोण को देखकर वह बोले- " ब्राह्मण श्रेष्ठ ! आपका स्वागत है। पर मेरे पास जो कुछ था , वह मैं बाँट चुका हूँ । अब यह मेरा शरीर और धनुर्विद्या ही है। बताइए, मैं आपके लिए क्या करूँ? "
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- 4इनमे से कोइ नहींfalse
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Answer : 1. "महा + ऋषि"
Q: ''कनक कनक में सौगुनी मादकता अधिकाय।
या खाए बौराय जग, वो पाये बौराय।।''
इस पंक्ति में किस शब्द शक्ति का प्रयोग हुआ है?
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63ba6c7e3d35cd0deec367d9या खाए बौराय जग, वो पाये बौराय।।''
इस पंक्ति में किस शब्द शक्ति का प्रयोग हुआ है?
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- 2रूढ़ि लक्षणाfalse
- 3प्रयोजनवती लक्षणाfalse
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Answer : 1. "अभिधा "
Q: वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध शब्द है?
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636a53d7825f2247ad70c65f- 1घनिष्ठtrue
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Answer : 1. "घनिष्ठ"
Q: शरण के लिए सही पर्यायवाची वाले शब्दों की पंक्ति को चुनिए।
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627ce96b7fd9300164bf75bd- 1आश्रय, रछा, बचावfalse
- 2आश्रय, रक्षा, बचावtrue
- 3आश्रय, रक्षा, बाचवfalse
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Answer : 2. "आश्रय, रक्षा, बचाव "
Q: किस वाक्य में 'कर्मवाच्य' का प्रयोग नहीं हुआ है?
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63a1a84536fed95f3e029dc3- 1चोर पकड़ा गया।false
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- 4विद्यार्थियों द्वारा श्रमदान किया गया।false
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Answer : 2. "वह बहुत देर से पढ़ रहा है।"
Q:निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नके उत्तर दीजिए :
इतिहास प्रमाणित कर देता है कि ऐसे दासत्व बहुत काल के उपरान्त एक अद्भुत संहारक शक्ति को जन्म देते हैं, जिसकी बाढ़ को रोकने में शक्तिशाली भी समर्थ नहीं हो सके। मनुष्य स्वभावतः जीवन से बहुत प्यार करता है, परन्तु जब सहयोगियों के निष्ठुर उत्पीड़न से वह नितान्त दुर्वह हो उठता है, तब उसकी ममता घोरतम विरक्ति में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ितों का समाधान संभव हो सकता है, परन्तु ऐसे में हताश और जीवन के प्रति निर्मम व्यक्तियों का संभाषण संभव नहीं है। ऐसे व्यक्तियों का वेग आँधी के समान चक्षुहीन, बाढ़ के समान दिशाहीन और विद्युत के समान लक्ष्यहीन हो जाता है।
'संहारक' शब्द का संधि - विच्छेद है
1067 0621f442130b5265430efc381
621f442130b5265430efc381इतिहास प्रमाणित कर देता है कि ऐसे दासत्व बहुत काल के उपरान्त एक अद्भुत संहारक शक्ति को जन्म देते हैं, जिसकी बाढ़ को रोकने में शक्तिशाली भी समर्थ नहीं हो सके। मनुष्य स्वभावतः जीवन से बहुत प्यार करता है, परन्तु जब सहयोगियों के निष्ठुर उत्पीड़न से वह नितान्त दुर्वह हो उठता है, तब उसकी ममता घोरतम विरक्ति में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ितों का समाधान संभव हो सकता है, परन्तु ऐसे में हताश और जीवन के प्रति निर्मम व्यक्तियों का संभाषण संभव नहीं है। ऐसे व्यक्तियों का वेग आँधी के समान चक्षुहीन, बाढ़ के समान दिशाहीन और विद्युत के समान लक्ष्यहीन हो जाता है।
- 1सम् + हारकtrue
- 2सम + हारकfalse
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- 4सन् + हारकfalse
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