Indian Parliamentary System

Rajesh Bhatia2 years ago 15.8K Views Join Examsbook
indian parliament system

Today I am providing Constitutional Provisions of Indian Parliament for  Competitive Exams. You can easily get 2-3 marks with the help of Constitutional Provisions of Indian Parliamentary System for Competitive Exams. This post of Constitutional Provisions of Indian Parliament for Competitive Exams is very important also related to  Directive Principles and Fundamental Duties.

Here’s a blog of Constitutional Provisions of Indian Parliament for Competitive Exams.  As you know Constitutional Provisions of Indian Parliamentary System is the very useful topic for Competitive Exams as like Functions of Central Government of India.

So, Do Practice Function of Indian Parliament and Indian Parliamentary System for Competitive Exams.


भारतीय संसद (भाग-5 अनुच्छेद 79 से 123 तक)

संसद के तीन अंग हैं –

1.राष्ट्रपति 

2. लोकसभा 

3. राज्यसभा 

संसद के दो संदन होते हैं |

1.लोकसभा – मूल संविधान में इसे जन्सदन लिखा गया जिसका उल्लेख अनुच्छेद 79 में हैं \

लोकसभा और राज्य सभा में तुलना 

क्र.सं.

तुलना का बिंदु 

लोकसभा

राज्यसभा

1.

उपनाम 

निम्न सदन B. जनता का सदन C.प्रथम सदन D.अस्थायी सदन 

A.उच्छ सदन 

B. राज्यों का सदन 

दितीय सदन 

स्थायी सदन 

2.

संरचना 

अनु. 81 में उल्लेख 

अधिकतम सदस्य संख्या: 552

राज्यों से निर्वाचित: 530

संध राज्यों से निर्वाचित: 20 

मनोनित सदस्य: २ 

अनु.80 में उल्लेख 

अधिकतम सदस्य संख्या: 250 

राज्यों संध राज्यों से निर्वाचित: 238 

मनोनित सदस्य: 12

(कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा में विशिष्ट स्थान) 

3.

वर्तमान कार्यरत सदस्य संख्या 

543 (निर्वाचित) + 2 (मनोनित) = 545 

243 (निर्वाचित) + 12 (मनोनित) = 245 

4. 

निर्वाचन पद्धति 

प्रत्यक्ष निर्वाचन – व्यस्क मताधिकार द्वारा 

अप्रत्यक्ष निर्वाचन – एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा 

5. 

निर्वाचनक मंडल 

परिसीमन आयोग द्वारा निर्धारित निर्वाचन क्षेत्र के सभी मतदाता (अनु.81 (2-क)

राज्य विशेष की विधानसभा के सभी निर्वाचित सदस्य 

या संध राज्य क्षेत्र की विधानसभा के सभी निर्वाचित सदस्य (अनु.80(5)

6.कार्यकाल 

कार्यकाल 

5 वर्ष (अनु.८३ (2)} मूल संविधान में 5 वर्ष; 

42 वें संविधान संशोधन 19 76 द्वारा 6 वर्ष और 44 वें संविधान संशोधन 19 78 द्वारा पुन: 5 वर्ष की गई |

6 वर्ष [अनु.83 (1)] 1/3 सदस्य प्रति दो वर्ष में नये निर्वाचित किये जाते हैं, अत: राज्यसभा कभी भी भंग नहीं हो सकती हैं |

7.

योग्यताएं 

न्यूनतम आयु: 25 वर्ष (अनु. 84 ख)

न्यूनतम आयु – 30 वर्ष [अनु. 84 (ख)]bbn


लोकसभा की विशेष शक्तियां

(i)लोकसभा में बहुमत रहने तक ही प्रधानमन्त्री और मंत्रिपरिषद पद पर बने रहते हैं |

(ii) आपातकाल को समाप्त करने के लिए केवल लोकसभा की सहमती आवश्यक हैं |

(iii) संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता हैं |

(iv) धन विधेयक केवल लोकसभा में ही प्रस्तावित किया जा सकता हैं | [अनु.109 (1)]

(v) धन विधेयक के सम्बन्ध में लोकसभा शक्तिशाली हैं | 14 दिन की अवधि में राज्यसभा धन विधेयक नहीं लौटाती हैं तो वह स्वत: ही दोनों सदनों से पारित समझा जाएगा | [अनु. 109 (5)]

(vi) धन विधेयक हैं या नहीं का अंतिम निर्णय लोकसभा द्वारा |

2. राज्यसभा की विशेष शक्तियां 

(i) उपराष्ट्रपति को पद से हटाने का प्रस्ताव पहले राज्यसभा में ही प्रस्तुत किया जाएगा (अनु.67)

(ii) दो-तिहाई बहुमत से राज्य सूचि के किसी भी विषय को राष्ट्रीय महत्त्व का घोषित कर संसद को कानून बनाने का अधिकार देना (अनु.249)

(iii) नई अखिल भारतीय सेवा का गठन (अनु.312)

(iv) राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा होने पर यदि लोकसभा भंग हो तो केवल राज्यसभा अनुमोदन कर सकती हैं |

3. लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन:

(i) राष्ट्रपति इस कार्य हेतु परिसीमन आयोग को नियुक्त करता हैं |

(ii) अब तक ४ परिसीमन आयोग गठित किय गये हैं | (1952, 1962, 1972, 2002)

(iii) चौथे अप्रिसिमान 2002 ने 2008 में पुन: परिसीमन किया हैं यह 26 तक लागू रहेगा |

(iv) चौथे परिसीमन आयोग के अध्यक्ष: डा. कुलदीप सिंह 

(v) चौथे परिसीमन में 2001 की जनगणना को आधार बनाया गया हैं | [87 वें संविधान संशोधन, 2003 द्वारा लागू]

(vi) चौथे परिसीमन में राज्यवार सीटों में परिवर्तन नहीं किया गया अपितु राज्य के अन्दर परिवर्तन किये गये |

4. दल-बदल कानून निषेध कानून:

(i) 52 वें संविधान संशोधन 1985 द्वारा 10 अनुसूची जोड़ी गई जिसमें दल-बदल निषेध कानून जोड़े गये हैं |

(ii) 1985 में यह व्यवस्था की गई की कम से कम किसी पार्टी के एक-तिहाई सदस्य एक साथ हो तो पार्टी का विखंडन हो सकता हैं |

(iii) 91 वें संविधान संशोधन 2003 द्वारा दल-बदल पर पूर्व प्रतिबन्ध हैं | 

(iv) प्रत्येक दल का एक सचेतक होता हैं जो व्हिप जारी करता हैं | सदस्य सदन की कारवाही में व्हिप के अनुसार ही मतदान कर सकता हैं | 

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About author

Rajesh Bhatia

A Writer, Teacher and GK Expert. I am an M.A. & M.Ed. in English Literature and Political Science. I am highly keen and passionate about reading Indian History. Also, I like to mentor students about how to prepare for a competitive examination. Share your concerns with me by comment box. Also, you can ask anything at linkedin.com/in/rajesh-bhatia-7395a015b/.

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